चल दिये …

लेके संग तेरे सारे सितम चल दिये,
दूर तुमसे अब तो, सनम चल दिये,

मुहब्बत बस मुहब्बत की, मिली तन्हाई मुझको,
जमाने के तरह बनकर, बेरहम चल दिये,

कोई कितना भी रोये, अब न लौटेंगे हम,
हम भी तेरे ही नक्श-ए-कदम चल दिये,

वही अंदाज अपना पुराना, मुस्कुराहटें लबों पर,
दिल मे ही दबाकर दिल का, जखम चल दिये,

सहम जाए दरिया भी, है यूँ अँगार आँखों में,
पर करके अपने आँखों को, बस नम चल दिये,

छोड़ सारे तोहफ़े, दुनिया भी अपनी लुटा करके,
हम बस लिए अपने हाथों में कलम चल दिये,

गढ़ मिसाल एक नई, बर्बादियों के हद की,
लुटा कर खुशियाँ औ’ लेके गम चल दिये,

अब ना रहा मुझे ऐतबार, किसी भी शख़्स पर,
अब तो मान अपने दिल का हुकम चल दिये,

भूल जाऊँगा उसे, और झूठे वादों को भी,
उसे दे आज ये आखिरी, कसम चल दिये,

जाँ पर आफत होगी इसमें बेशक, फिर भी,
जाँ की बाज़ी लगा आज, हम चल दिये,

© Kumar Sonal

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इजाजत दे मुझे …

मजबूरियाँ भी इजहार करनी है, कई शिकायतें भी हैं तुझसे,
इतनी भी क्यूँ है बेरुखी, बस एक दफा तो बात कर मुझसे,

किनारा करा दे मेरा, घुटन के हर लहर से, हमेशा के लिए,
इजाजत दे मुझे जाने को, तेरे शहर से, हमेशा के लिए …

दर्द के तराने अब मैं और नहीं सह सकता,
पी कर आँसू अब मैं, और नहीं रह सकता,

देख! मैं मिट जाऊँगा, इस इश्क़ की मीठी-जहर से, हमेशा के लिए,
अब इजाजत दे मुझे जाने को, तेरे शहर से, हमेशा के लिए …

बिखर से गए हैं सब सपने, तेरे आजमाइशों से,
अब रिहाई माँगती है मेरी जरूरतें, तेरे ख़्वाहिशों से,

अब आजाद होना चाहता हूँ, इन सपनों के खंडहर से, हमेशा के लिए,
इजाजत दे मुझे जाने को, तेरे शहर से, हमेशा के लिए …

गम के बहुत करीब आ गया था मैं, झुठी-खुशियों के ख़्वाहिश में,
भूल चुका था मैं, खुद का वजूद, इन चकाचौन्धों की साजिश में,

मुझे लौटना है अँधेरों के पास, दूर इस बेदर्द-सहर से, हमेशा के लिए,
इजाजत दे मुझे जाने को, तेरे शहर से, हमेशा के लिए …

जो तुम लौटोगे अगर, तो कोई इशारा करो,
जगह दो दिल में या फिर बंजारा करो,

बस एक तेरे इंतजार में, ज़िंदग़ी के लम्हें गए हैं ठहर से,
अब तो इजाजत दे दे मुझे, जाने को तेरे शहर से,

हमेशा के लिए, हमेशा के लिए ….

© Kumar Sonal

होली है …

गुलाल अबीर ले हाथों में, दीवानों की निकली टोली है,
शर्म हया को छोड़कर आ जाओ, यारों होली है,

चढ़ा ठंडई भांग से मिश्रित, निकली सब हमजोली है,
युवा, वृद्ध सब मिलकर झूमते, बुरा न मानो होली है,

बापू की पगड़ी, माँ का आँचल, कुछ लाल तो, कुछ पीली है,
दिल की जमीं पर खुशियों की, इंद्रधनुषी कलियां खिली है,

है गीला अम्बर, गीली धरती, रँगों में सब ने खेली है,
श्याम की बंसी पर थिरक रही, राधा संग गीली चोली है,

साल भर से पिया की राह देखती, दुल्हन नई-नवेली है,
आ जाओ अब तो सरहद से, ससुराल में पहली होली है,

सजनी देखे है बस, एक ओर से, सजना को घेरे सहेली है,
बेताब सजनी मिलने को, पर सखियां करती ठिठोली है,

आ गए घर को सब घरवाले, खुशियों से भर गयी झोली है,
सिमट गई दूरी, मिट गया हर द्वेष, प्रेम ने आँखे खोली है,

शर्म हया को छोड़कर, आ जाओ यारों होली है,

© Kumar Sonal & Anand Shukla

तेरा नसीब

तेरे नसीब में हो कहीं मुझ से बेहतर संसार,
या शायद तेरे किस्मत में ही न हो मेरा प्यार,

मैं कद्र करता हूँ तेरी चाहतों का, पर मेरी भी कुछ मजबूरी है,
ये बस खासा तुझ से ही नहीं, मेरी खुद से खुद की भी दूरी है …

© Kumar Sonal

खुशनुमा जज्बात …

दिल में मेरे जो ये लगने लगें हैं जमावड़े, खुशनुमा-कोमल जज्बातों के,
कहीं ये सिर्फ कुछ पल का तो नहीं, ये भी एक ख्याल है खयालातों के …

© Kumar Sonal