रामधारी सिंह दिनकर — जन्मदिवस – 23 September.

★ सुनूँ क्या सिंधु मैं गर्जन तुम्हारा, कि स्वयं युग-धर्म की हुँकार हूँ मैं, 

सुनूँ क्या बंधु मैं गर्जन तुम्हारा, कि स्वयं सिमरिया का भूमिहार हूँ मैं …

© – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

आज ही के दिन, उदीप्तिमान हुआ था, साहित्य के ललाट में एक सूर्य,
आज ही के दिन, अँकुरित हुआ था, एकमात्र पारिजात, साहित्यिक फुलवारी में,
आज ही के दिन, हिम पिघला था, साहित्य का एक नया निर्झर बनाने को,
आज ही के दिन हुई थी शुरुआत, विचारों से विस्फ़ोट का, देश के हुँकार का …

आज ही के हुआ था जन्म, अमिट लकीर का, कभी न बुझने वाला ज्योतिपुंज का …
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का …🙏🙏🙏

★#दिनकर_है_वो …

साहित्य जो वीर, तो शौर्य है वो,
साहित्य जो वंश, तो मौर्य है वो …

साहित्य जो दीप, तो रोशनी है वो,
सहित के पराकाष्ठा का प्रदर्शनी है वो …

साहित्य जो मानव, तो जल है वो,
साहित्य जो समंदर, तो तल है वो …

कल्पनाओं में सत्य का लश्कर है जो,
अमिट लेखनी का बुनकर है वो,
रामधारी सिंह’दिनकर’ है वो …

साहित्य जो व्योम, तो रवि है वो,
जन की हुंकार, #राष्ट्रकवि है वो …

◆ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को समर्पित मेरी ये लिखने की ज़िद …
🙏🙏🙏

© Kumar Sonal

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